गाय या भैंस-4

incest sex सुधिया: तो क्या हो गया बेटी, तू है ही इतनी सुन्दर। सुनील के पिता भी कह रहे थे कि तेरा बदन बड़ा सुन्दर हो गया है। हम औरतों को गर्व होना चाहिए अगर मर्द हमारे बदन कि तारीफ करें।
मधु: पर माँ वो मेरा छोटा भाई है, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।
सुधिया: तू भी न! तेरा पति राहुल अपनी माँ के साथ ही भाग गया और तो जवान भाई को अपना बदन नहीं छूने देना चाहती। चल, अगर वो ज्यादा बदमाशी करे तो बताना।

(मधु के तो होश ही उड़ गए कि उसकी माँ चाहती थी कि उसका भाई उसके बदन के साथ छेड़-छाड़ करे और उसके बाबूजी भी उसके बदन की तारीफ कर रहे थे।)

शाम में श्याम घर पे आये तो मधु उन्हें खाना देने गयी। मधु अभी हाफ पैंट और टॉप में थी। श्याम ने मधु को अपनी गोदी में बैठते हुए बोला- बेटी मन तो लग रहा है न! (अपनी गदराई बेटी को गोदी में बिठा के श्याम को बहुत अच्छा लगा| बचपन में वो मधु को गोदी में बिठाया करते थे पर जबसे मधु 18 साल कि हुई उन्होंने उसे नहीं बिठाया था, पर अब श्याम को भी लगता था कि वो मधु के साथ ओपन हो सकते थे।)

मधु के नंगे बाहों और जाँघों पे हाथ फेरते हुए श्याम ने बोला: पता नहीं कैसी औरत होगी रजनी जो राहुल ने मेरी बेटी को छोड़ दिया। मेरी बेटी कितनी सुन्दर है। बिलकुल अपनी माँ पर गयी है| बेटी मैं तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा यहाँ। तुम ख़ुशी से रहो यहां पर। (ऐसा कहते हुए श्याम ने मधु के स्तनों पे हाथ रख दिया। मधु उठ गयी और बोली बाबूजी आप खाना खाओ। मधु अब समझ रही थी कि अब उसके लिए एक बेटी और दीदी वाली इज्जत पान असंभव था। सभी बस उसके बदन के फेर में थे)

काफी दिनों तक यही चलता रहा, रात में सुनील उसे छेड़ता और दिन में श्याम। उसे पता था कि किसी दिन दोनों खुल-कर उसके बदन को भोगेंगे, तो उसने सोचा क्यों नहीं वो खुद ऐसा प्लान बनाये कि उसका इंटरेस्ट प्रोटेक्टेड रहे। उसे डर था कि कहीं उसे घर न छोड़ना पड़े। वो दूसरी शादी तो करना चाहती थी पर साथ में उसे डर था कि कहीं उसका दूसरा पति भी न ख़राब निकले सो उसने एक अच्छी तरकीब बनाई।

रात में जब सुनील उसे चूम रहा था तब मधु ने उसके लंड को उसके हाफ पैंट में हाथ घुसा के पकड़ लिया और बोली- काफी दिनों से तू मुझे छेड़ रहा तुझे शर्म नहीं आती बड़ी दीदी को छेड़ते हुए।
सुनील: मधु के गालों को चाटते हुए- मैं तुम्हे अपनी दीदी नहीं मानता, ऐसे बदन कि औरतें दीदी नहीं होती।
मधु: (राहुल के लंड को मसलते हुए) ऐसे बदन का क्या मतलब?
सुनील: मधु के स्तनों और चूतड़ों को पकड़ता हुए बोला- इतने बड़े चूतड़ और स्तन किसी दीदी के नहीं होते।
मधु: अच्छा तुझे मैं क्या दिखती हूँ?
सुनील: मेरी चुड़क्कड़ मधु।

मधु: तुझे औरतों के स्तन बड़े उतेज्जित करते हैं न! फिर माँ के स्तन तो और भी बड़े हैं! वो तुझे माँ दिखती है या चुड़क्कड़ सुधिया? (मधु ने महसूस किया की उसने जैसे ही सुधिया का नाम लिया राहुल का लंड जोर-जोर से झटके मारने लगा)
सुनील: सुधिया नहीं दूधिया! उसके दूध पिऊंगा मैं
मधु: (राहुल के लंड को मसलते हुए) 47 साल की खुद की माँ को चोदने के लिए ये तेरा लंड बड़ा उतेज्जित हो रहा है। माधरचोद बनेगा तू तो। वैसे तेरी दूधिया का बदन खूब कैसा हुआ है, तुझे बड़ा मज़ा आएगा उससे चिपकने में। पर पहले अपनी दीदी को चोद ले।

फिर मधु ने सुनील को अपने ऊपर चढ़ा के खुद के बदन को जम कर चुदवाया। सुनील के जीवन की पहली चुदाई थी ये। और वो खुद की ही बड़ी बहिन की चुदाई कर रहा था। सुबह राहुल खूब खुश था। सुबह उठने के बाद वो मधु को किश करता हुआ बोला- दीदी, तुम क्या माल हो! पता नहीं उस बेवक़ूफ़ राहुल ने तुम्हे कैसे छोड़ दिया।
मधु: उसके पास भी तेरी तरह एक दूधिया थी।
(और फिर दोनों हॅसने लगे)

दिन में जब मधु सुधिया की मालिश करने को जाने लगी तो उसने सुनील को बोला की वो दरवाज़े को खुला रखेगी और वो देख सकता है सुधिया को नंगा।

मधु ने सुधिया को नंगा करके बिस्तर पे पेट के बल लिटाते हुए उसके पीठ पर तेल लगाकर मालिश करने लगी।

सुधिया पूरी नंगी थी। उसके विशाल पहाड़ जैसे नितम्ब काफी ऊपर तक उठे हुए थे। उसने अपना सर तकिये पे रखा हुआ था और मधु के उसके सर के ऊपर चादर रख दिया था ताकि उसे कुछ दिखे नहीं। सुधिया चुड़क्कड़ तो थी पर वो अनाचारी नहीं थी। पत्नी होने के नाते वो श्याम को खुश रखना चाहती थी। उसे सुनील के मधु को किश करने से कोई दिक्कत नहीं थी। वो दोनों को भाई-बहिन मानती थी। पर उसे क्या पता था की दोनों भाई-बहिन कल रात एक दुसरे को चोद चुके हैं।

तभी धीरे से नंगे क़दमों से सुनील अंदर आ गया और सुधिया के पैर की तरफ आके अपनी माँ के नंगे पिछवाड़े को आँख फाड़ के देखने लगा।

मधु ने सुधिया के चूतड़ों पे हाथ फेरते हुए कहा: माँ, तुम्हारे चूतड़ बहुत बड़े हैं। बाबूजी बहुत तारीफ करते हैं तुम्हारे बदन की। वैसे राहुल की माँ रजनी के भी चूतड़ ऐसे है बड़े थे। सभी मर्दों को बड़े चूतड़ अच्छे लगते हैं न माँ!

माँ: हाँ बेटी, सभी मर्दों को गदराई औरतें पसंद आती हैं, वैसे तू भी अच्छी खासी गदरा गयी है। तेरे बाबूजी तभी तो तुझे अपनी गोदी में बिठाना चाहते हैं।
मधु सुधिया की गांड के फांक में हाथ डालते हुए मालिश करने लगी। सुधिया सीसियाने लगी और बोली बेटी तेरी हाथ की मालिश बहुत मज़ा आता है।

मधु: माँ कभी सुनील से भी मालिश करवा लो। वो भी तुम्हारे बदन को पसंद करता है।
सुधिया: धत! अपने बेटे से नंगे बदन की मालिश? क्या कह रही है तू
मधु: नहीं माँ, मालिश से क्या होता है! वैसे वो तुझे बहुत पसंद करता है। रात में मुझे बाहों में लेके ‘मेरी सुधिया’ बोल के होठों को किश करता है। मैं जगी होती हूँ पर उसे लगता है की मैं सोई हुई हूँ।
(सुनील ये सब सुन रहा था और उसे भी उतेजना हो रही थी)

सुधिया: चुप कर मधु! तूने गलत सुना होगा नींद में। मेरा बेटा भला मुझे ‘मेरी सुधिया’ क्यों बोलेगा। मैं उसकी माँ हूँ।
मधु: अच्छा, मेरी मधु बोले तो ठीक मेरी सुधिया बोले तो तुम्हे विश्वास नहीं। वो भी जवान है। उससे छोटी उम्र से ही राहुल अपनी माँ रजनी के बदन को चोदता था। तुम तो रजनी से भी ज्यादा गदराई और खूबसूरत हो, हो सकता है सुनील तुमसे चिपकना चाहता हो।
सुधिया: क्या बाके जा रही है, मधु।
(और फिर सुधिया ने करवट लेने को हुई, सुनील तब तक चुपके से कमरे के बाहर चला गया था। कुछ देर तक सुधिया के दूध और पेट की मालिश करने के बाद मधु और सुधिया दोनों बारी-बारी से नहाने लगे)