मेरे दोस्त की मकान मालकिन

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मैं गुजरात का रहने वाला हूं। मेरा नाम राहुल है। मेरे परिवार मे मेरे और मेरे पिताजी के सिवा कोई नहीं है। मैं और मेरे पिताजी एक छोटे से घर में रहते थे। मेरे पिताजी एक ऑटो ड्राइवर थे, लेकिन मेरे सपने बहुत बड़े थे। मैं एक बड़ा आदमी बनना चाहता था। नाम कमाना चाहता था अपने पिताजी को ऐसे ऑटो चलाते देख मुझे बहुत बुरा लगता था लेकिन करते भी तो क्या घर को चुनना होगा ऊपर से मेरी पढ़ाई का खर्चा मेरे पिताजी बड़ी मेहनत करके पैसे जमा किया करते थे। ताकि वह मेरे पढ़ाई में काम आ सके। मैं चाहता था कि मैं पढ़ लिखकर कुछ बन सकू। अपने पिताजी के लिए कुछ करूं ताकि वह इस तरह ऑटो ड्राइवर ना रहे मेरे पिताजी के भी कई सपने थे। जो मैं पूरा करना चाहता था।

मैं रात रात भर पढ़ाई करता और खूब मेहनत करता। ताकि मैं अच्छे नंबर ला सकूं कुछ समय बाद मेरा कॉलेज भी पूरा हो गया। अब मुझे खुद का बिजनेस करना था ना ही किसी के यहां नौकरी लेकिन बिजनेस के लिए तो मुझे पैसों की आवश्यकता थी। इतने पैसे तो मेरे पास थे ही नहीं फिर मैंने पैसे इकट्ठा करने के लिए नौकरी की तलाश की उसके बाद मुझे एक अच्छी नौकरी मिली। मैं बहुत खुश हुआ मेरे नौकरी करने से पैसों की दिक्कत कम होने लगी। मेरे पिताजी को भी अब ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं थी क्योंकि मैं अच्छा खासा कमा लेता था। जिससे मैं अपनी जरूरतों को पूरा कर सकूं लेकिन मुझे अभी इससे भी बड़ा कुछ करना था। जिसके लिए मैं पैसे इकट्ठा करना चाहता था। धीरे धीरे मैंने अपना बिजनेस शुरू किया देखते ही देखते मैंने खुद का ऑफिस खोल लिया। जमा फिलहाल 8 से 10 कर्मचारी काम करते थे । मैंने और मेहनत की ताकि मे और ऊंचाइयों को छू सकूं। अपने पिताजी के सपनों को पूरा करना चाहता था। मैं चाहता था कि मेरे पिताजी एक ऑटो ना चलाएं बल्की ऐसा आराम की जिंदगी जिए। यही सब मैं अपने पिताजी को देना चाहता था।

एक दिन मेरी जिंदगी में एक लड़की आई वह बहुत ही सुंदर थी। वह बहुत हॉट और सेक्सी थी।  मैंने उसे देखते ही उसी दिन मन ही मन उससे शादी करने का फैसला ले लिया। मैं धीरे-धीरे उससे मिलने लगा। वह भी मुझसे मिलने लगी। कुछ समय बाद वह भी मुझे पसंद करने लगी फिर मैंने उससे शादी की बात करी वह भी राजी हो गई और फिर एक दिन हमारी शादी हो गई। सुहागरात के दिन दो मैंने उसे बहुत चोदा जिससे 1 हफ्ते तक उसकी चूत मैं दर्द रहा। मेरे पिताजी बहुत खुश थे सब खुशी से रह रहे थे। सब कुछ एकदम मेरे सोचने के मुताबिक सही चल रहा था। हमारा एक बेटा हुआ सभी उसे बहुत प्यार करते थे। ऐसे ही कुछ दिन बीतते गए अब मेरे पिताजी भी बूढ़े हो चुके थे। इस वजह से मेरी पत्नी को मेरे पिताजी के साथ रहना बिल्कुल पसंद नहीं था। क्योंकि वह हर समय कुछ ना कुछ नुकसान करते रहते थे। बूढ़े होने के कारण उनके हाथ पैर हिलते थे खाना खाते समय भी वह सारा खाना जमीन पर गिरा देती थे। यह मुझे भी अच्छा नहीं लगता था।

फिर मैंने अपनी पत्नी के कहने पर एक कमरे से पुराना प्लंग निकाल कर उन्हें अलग से खाने के लिए बैठा दिया वह हमेशा अकेले उसी मेज पर खाना खाते थे। हमने उन्हें एक लकड़ी का कटोरा दिया था। ताकि वह गिरने पर भी टूट ना सके। मुझे बुरा तो बहुत लगता था। मुझसे यह सब देखा नहीं जा रहा था। तो मैंने पिताजी के लिए एक नौकरानी रखने का मन बना लिया। मैं नौकरानी को ढूंढने लगा। मैंने अपने दोस्तों को भी बोला यार कोई अच्छी नौकरानी हो तो देख लेना और मुझे बता देना। उन्होंने कहा ठीक है यदि हमें कोई मिलती है। तो हम तुझे बता देते हैं। तभी मेरे दोस्त के यहां से एक फोन आया और वह कहने लगा हमारे यहां पर जो नौकरानी है। उसकी लड़की भी काम ढूंढ रही है। तो क्या तुम उसे रखना चाहते हो। मैंने कहा ठीक है उसको हमारे पास भेज देना मैं उससे बात कर लेता हूं।

अब उस नौकरानी की लड़कियां हमारे घर पर आई और कहने लगी मुझे तिवारी जी ने भेजा है। फिर मैंने उससे पूछा तुमने इससे पहले कहीं काम किया है। उसने कहा नहीं हमने कहीं काम नहीं किया है। यह मेरी पहला ही काम है। मैंने उसको सारी चीजें समझा दी और कहा मेरे पिताजी को तुम अच्छे से ध्यान रखना है। क्योंकि वह काफी बुजुर्ग हो गए हैं और खाना गिरा देते हैं। तो तुम्हें उनको देखना है। उस लड़की की उम्र में है 20 साल की रही होगी। अब हमारे यहां काम करने लगी और मेरे पिताजी का अच्छे से ध्यान रखती थी। मुझे यह देखकर काफी खुशी होने लगी। मैं उसके काम से बहुत खुश था क्योंकि मुझे मेरे पिता जी की कोई टेंशन नहीं थी कि उनका ध्यान में नहीं रख पाऊंगा। तो वह नौकरानी उनका ध्यान रख लेगी। मेरी बीवी तो एक नंबर की हरामी हो गई थी। उसको यह समझ नहीं आ रहा था कि मेरे पिताजी की  वजह से उसकी शादी मेरे साथ हुई है।

यदि वह नहीं चाहते तो शायद मुझसे शादी भी नहीं होती। वह लड़की मेरे पिताजी का बहुत ही अच्छे से ध्यान रखती थी एक एक चीज का उन्हें कभी कोई समस्या नहीं होने देते थे। इस बात से मैं उस लड़की की ओर आकर्षित होने लगा था। वह बहुत ही कमसीन और कच्ची उम्र की लड़की थी। वैसे तो मैं ज्यादातर व्यस्त ही रहता था। किंतु अब मैं थोड़ा समय निकालने लगा था। एक दिन वह बाथरुम में नहा रही थी। शायद वह अंदर से बंद करना भूल गई और मुझे बहुत तेज टॉयलेट आ रहा था। मैं सीधा एकदम से अंदर घुस गया मैंने उसके नंगे स्तन देखे और उसकी नंगी गांड देखकर मेरा मन उसकी तरफ पूर्ण रूप से आकर्षित हो गया क्योंकि मेरी बीवी मैं अब वो बात रही नहीं थी। वह मेरे साथ ज्यादा सेक्स संबंध बनाती भी नहीं थी। तो मैंने उस दिन सोच लिया कि अब मैं इस लड़की के साथ ही सेक्स करूंगा। उस दिन मैंने उसके नाम का मुठ मारा बहुत समय बाद ऐसा हुआ था जब मेरा माल गिरा था। पता नहीं कितने अरसे बीत गए थे मुझे यार सब करे हुए मुझे बहुत ही शांति मिल रही थी और अच्छा भी लग रहा था। मैंने अपनी बीवी को उसके मायके भेज दिया और कहने लगा तुम कुछ दिन के लिए अपने मायके हो आओ। तो तुम्हारा मूड भी अच्छा हो जाएगा।

उसको भी एहसास होने लगा था कि उसको भी कुछ दिन के लिए अपने मायके हो आना चाहिए। तो वह मेरे बच्चे को ले कर चली गई। मेरी बीवी जैसे ही मायके गई तो मैंने अपने काम वाली की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया। अगली सुबह मैं बिस्तर पर नग्न लेटा हुआ था। वह मेरे बिस्तर में आकर सफाई करने लगी उसने मेरा लंड देखा। तो वह खड़ा हो रखा था। तभी मैं भी खड़ा हो गया और उसको देखा तो वह सफाई कर रही थी। मैंने उससे पूछा तुम क्या कर रही हो। उसने कहा मालिक मैं सफाई कर रही हूं। फिर मैंने कहा तुमने क्या देखा उसने कुछ नहीं कहा। मैंने उसे कहा आओ मेरे पास बैठो तुम्हारा नाम क्या है। उसने कहा मालिक मेरा नाम शीला है। मैंने उसे पूछा यह क्या है जो खड़ा हो रखा है। वो कहने लगी मुझे नहीं मालूम मैंने उससे कहा यह लंड है।

तुमने कभी किसी का लंड लिया है कभी नहीं मैंने कहा मैं तुम्हें कुछ पैसे देता हूं। तुम मेरे लंड को अपनी चूत मे लोगी। अब मैंने उसे कहा मैंने तुम्हें बाथरूम में देखा था। तुम उस दिन नंगी नहा रही थी। ऐसा कहते कहते मैंने उसके सूट को उतार दिया। अब उसके स्तन मेरे हाथों में थे मैं उनको जोर से दबाने लगा। वह मस्त हो गई उसने मेरा लंड पकड़ लिया और कहने लगी मैं इसे अपने मुंह में ले लूं मैंने कहा हां इसे अपने मुंह में ले लो और अच्छे से चूसो उसने वैसा ही किया थोड़ी देर बाद मैंने उसकी बालों वाली चूत को अपने मुंह से चुसने लगा। ऐसा करते करते उसको मजा आ रहा था। फिर मैंने अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया और उसको इतना जोर से रगड़ा मानो उस के पसीने छूट गए हो। मैं बड़ी तेजी से अंदर-बाहर कर रहा था। उसकी अभी टाइट चूत थी। तो उसे खून भी आने लगा उसको मजा आ रहा था। तो वह कहने लगी मालिक आप बड़े अच्छे हैं और थोड़ा तेज तेज और कीजिए 200 झटकों के बाद मेरा गिरने को हो गया मैंने उसकी योनि में अपना तरल  पदार्थ गिरा दिया ।जिससे वह प्रेग्नेंट हो गई और मुझे उससे दूसरी शादी करनी पड़ी। वह मेरे पिताजी का भी ध्यान अच्छे से रखती थी। मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था।